रायपुर, 24 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, असर और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में State-Level Health Technology Assessment (HTA) Sensitization Meeting का आयोजन संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, नवा रायपुर के सभा कक्ष में किया गया। बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में उपयोग हो रही नई तकनीकों, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और असर के वैज्ञानिक आकलन और इसके आधार पर स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताएं तय करने पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।

ICMR-NIHR, भुवनेश्वर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ के सहयोग से आयोजित बैठक का उद्देश्य राज्य के अधिकारियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को Health Technology Assessment (HTA) की अवधारणा, प्रक्रिया और उपयोगिता से परिचित कराना था। बैठक में चर्चा हुई कि किसी नई स्वास्थ्य तकनीक, दवा, चिकित्सा उपकरण या स्वास्थ्य सेवा को अपनाने से पहले उसके वैज्ञानिक प्रमाण, असर और लागत-प्रभाव का व्यवस्थित मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि HTA के जरिए स्वास्थ्य तकनीकों के वैज्ञानिक प्रमाण, स्वास्थ्य पर असर और आर्थिक प्रभाव का आकलन कर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए फैसले लेने में मदद मिलती है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राथमिकताएं तय करने और सबूतों पर आधारित नीतियां बनाने की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है।

बैठक में HTA की अवधारणा, सिद्धांत और सबूतों पर आधारित स्वास्थ्य फैसलों में इसकी भूमिका पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। ICMR-NIHR की ओर से HTA के व्यावहारिक उपयोग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इसके असर के उदाहरण दिए गए। राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के संबंध में डायग्नोस्टिक टेस्ट की लागत-प्रभाव, AI आधारित Chest X-ray और MDR-TB के लिए BPaLM/BPaL दवा जैसे नए प्रयोगों का जिक्र किया गया, जिन्हें मूल्यांकन के बाद राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम में अपनाया गया है।

बैठक में HTA Resource Hub की Principal Investigator; डॉ. कविता राजसेकर, Scientist-F, HTAIn, Department of Health Research, नई दिल्ली; डॉ. सुलग्ना नायक, Project Senior Health Economist (Medical), ICMR-NIHR, भुवनेश्वर; तथा डॉ. देबदत्ता भट्टाचार्य, Scientist-E एवं Hub Coordinator, ICMR-NIHR, भुवनेश्वर सहित विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, ICMR-NIHR और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों के अधिकारी और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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