रायपुर 3 अगस्त 2026। रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आज प्रोजेक्ट ‘सहारा’ का आयोजन किया गया। जिसके तहत दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण बांटा गया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CM साय ने कहा, एक अच्छे और विकसित समाज की पहचान यही है कि वहां हर व्यक्ति को बराबर मौका, सम्मान और आगे बढ़ने का हक मिले। दिव्यांगजन हमारे समाज का जरूरी हिस्सा हैं। उनकी काबिलियत और हौसले को सही मौका देना सरकार की जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों को सामाजिक, पढ़ाई और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रही है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े होकर समाज की मुख्यधारा में सम्मान से जी सकें। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर इंडोर स्टेडियम के सुधार, मरम्मत और सुंदरता के लिए 7 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेल के लिए अच्छी जगह बनाना सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी जरूरी है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बहुत से दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, कान की मशीन, नकली हाथ-पैर, बैसाखी, छड़ी* और दूसरे आधुनिक उपकरण दिए। उन्होंने लोगों से बात भी की और कहा कि ये उपकरण सिर्फ सामान नहीं हैं, ये आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा की नई शुरुआत हैं। इनकी मदद से दिव्यांगजन पढ़ाई, नौकरी, आने-जाने और रोज के कामों में खुद पर निर्भर बनेंगे और समाज से और मजबूती से जुड़ेंगे।

CM साय ने बताया कि रायपुर जिले में खास अभियान चलाकर दिव्यांगजनों की जांच की गई। इसमें 1600 से ज्यादा दिव्यांगजन मिले। इस काम के लिए भारत सरकार से 3 करोड़ 58 लाख रुपये मिले हैं। इसके लिए उन्होंने PM नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान में पहले 500-600 लोगों को उपकरण मिल चुके थे। आज 1000 से ज्यादा लोगों को और उपकरण दिए गए। इस तरह कुल 1739 दिव्यांगजन प्रोजेक्ट ‘सहारा’ से लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के लिए उपकरण देने के साथ-साथ पेंशन, पढ़ाई-नौकरी में आरक्षण, कौशल ट्रेनिंग, पुनर्वास और दूसरी योजनाएं भी चला रही है। सरकार की कोशिश है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन सरकारी मदद से वंचित न रहे। उन्होंने सभी से योजनाओं का फायदा लेने को कहा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की योजनाओं वाले स्टॉल देखे। उन्होंने लोगों से बात करके जाना कि उन्हें योजना का लाभ मिला या नहीं। अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर योजना का लाभ ईमानदारी और संवेदना के साथ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।