रायपुर, 27 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। साय ने कहा है कि लगभग सौ बार चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब बौखलाहट में लगातार देश विरोधी आचरण कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस अब देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने, लगातार झूठ और धोखे की राजनीति कर देश को बदनाम करने में जुटी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह साबित हो गया है कि आयोग में मतभेद संबंधी कांग्रेस के सभी दावे न केवल खोखले हैं, बल्कि जान-बूझ कर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और भारत की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की राहुल गांधी की सोची-समझी साजिश है। केंद्रीय चुनाव आयोग की संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। यह फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेस सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उसका झूठ फिर से बेनकाब हो गया है। श्री साय ने कहा कि अपने संयुक्त बयान में आयोग ने यह साफ किया है कि एसआईआर समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। भारत के चुनाव आयोग की दुनियाभर में साख है। उसकी निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कांग्रेस को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट भी सिर्फ कल्पना के अलावा कुछ नहीं है। खबर में कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे जिस पत्र का जिक्र है, वह न तो किसी नीतिगत विषय से जुड़ा है, न ही एसआईआर से जुड़ा है। वह सामान्य प्रशासनिक विषय था। वैसे भी चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति जिम्मेदार है, इसलिए कैबिनेट सचिव को किसी नीतिगत मामले पर पत्र लिखने का कोई मतलब ही नहीं है, न ही आयुक्तों ने ऐसा कोई पत्र लिखा है। इस बात पर अफसोस जताया कि जिन विषयों को सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहरा चुका है, उसके खिलाफ भी कांग्रेस झूठ फैला रही है। फॉर्म-6 के घोषणापत्र समेत कई विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही पक्ष में फैसला आ चुका है, फिर भी कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की नाकाम कोशिश करती रहती है। कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।

साय ने कहा कि जब भी कांग्रेस जनता की अदालत में हारती है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगाने लगती है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े बयान ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावना से भरे प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस. एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी ने शनिवार को बैठक कर एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जिसमें यह साफ कर दिया गया है कि देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन समेत सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घटिया काम कर रहा था। साय ने कहा कि देश की जनता अच्छी तरह जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि एक आदतन अपराधी की तरह राहुल गांधी लगातार संविधान का अपमान कर रहे हैं। संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं। हर बार और हर मंच पर मुंह की खाते हैं, बार-बार माफी मांगते हैं और फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है। इससे पहले ईवीएम पर सवाल उठाते थे। उसे ‘ब्लैक बॉक्स’ कहते थे लेकिन उसी ईवीएम से जीत कर स्वयं भी सांसद हैं। और कई राज्यों में उनकी न केवल सरकार है बल्कि 600 से अधिक विधायक और 99 लोकसभा सदस्य हैं, जो इसी चुनाव प्रक्रिया और इसी ईवीएम से चुन कर आए हैं। जीत जाने पर सरकार भी बनाना, विधायक और सांसद भी बनना, इसी चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेकर राजनीति करना और उसी पर लगातार हमला करना।

उन्होंने राहुल गांधी भारत को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। यहाँ तक कि अमेरिका के दौरों में भी राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है और उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। राहुल गांधी ने उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई ऐतिहासिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को भी खून की दलाली कहने जैसा शर्मनाक बयान दे दिया था। उनके द्वारा की गई ऐसी हरकतों की एक लंबी सूची है। बात चाहे ईवीएम की हो या कैग की, जांच एजेंसियों की या फिर कोर्ट की। सबका अपमान करने, रंगे हाथ पकड़े जाने पर माफी मांग कर भाग खड़े होने और फिर अगले दिन से वही ऊल-जुलूल कहते रहने को कांग्रेस ने अपनी नीति बना ली है।

दशकों तक देश पर एकछत्र शासन करने वाली कांग्रेस की ऐसी दुर्गति वास्तव में शर्मिंदा करती है। साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को 2018 में एकतरफा और ऐतिहासिक बहुमत मिला था। वह इसी चुनाव प्रक्रिया द्वारा ईवीएम से ही मिला था। वह तब तीनों राज्य जीत गई थी। अभी भी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 35 विधायक हैं। क्या वे सभी यह मानते हैं कि गलत प्रक्रिया से चुनकर आए हैं? अगर वे यह मानते हैं कि उनके निर्वाचन की प्रक्रिया सही नहीं है तो क्या उन्हें विधायक रहने का नैतिक अधिकार है? कांग्रेस के हर जनप्रतिनिधि को यह सवाल खुद से पूछना चाहिए। जीत गए तो प्रक्रिया अच्छी और हारे तो गलत, ऐसा नहीं होता है।