रायपुर। लंबे विवादों के बाद आखिरकार रायपुर की NIT चौपाटी को आज आमानाका शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन शिफ्टिंग से पहले भारी विवाद देखने को मिला। बीते रात से ही वेंडर्स, कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय समेत अन्य नेता धरने पर बैठे थे, जो आज सुबह तक जारी रहा। इसी बीच जन निगम की टीम चौपाटी हटाने पहुंची, तो प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता जेसीबी के सामने लेट गए। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच झूमा-झटकी भी हुई। जिसके बाद नेताओं और व्यापारियों को पुलिस बलपूर्वक हटाकर सेंट्रल जेल ले गई।

इधर वेंडर्स भी शिफ्टिंग को लेकर काफ़ी हताश नजर आए। उनका कहना हैं कि बिना बातचीत किए, बिना तैयारी और बिना विकल्प दिए दुकानों को हटाने से उनका कारोबार ठप हो गया है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी की परेशानी खड़ी हो गई है। क्योकि स्टॉल को तो नई जगह में शिफ्ट कर दिया गया हैं, लेकिन अभी उस जगह पर पानी, बिजली, लाइट की व्यवस्था नहीं हैं। साथ ही ये स्टॉल कब ओपन किए जाएँगे इसकी जानकारी भी निगम ने वेंडर्स को नहीं दी हैं। बता दें कि वेंडर्स को देर रात ही निगम के अधिकारियों में मुखाग्र दुकाने खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, कि सुबह 5 बजे तक दुकान खाली कर दें नहीं तो बुलडोजर की करवाई होगी।

बता दें कि रायपुर में लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च करके चौपाटी का विकास किया गया था, जिसका पूर्व विधायक राजेश मूणत ने कड़ा विरोध किया था। 2023 में भाजपा सरकार आने के बाद चौपाटी को हटाने और उस स्थान पर नालंदा-2 बनाने की योजना पर तेजी से काम शुरू हुआ।

नवंबर 2025 में नगरीय प्रशासन ने नालंदा-2 के लिए टेंडर पूरे होने की जानकारी दी और 15 नवंबर से चौपाटी शिफ्टिंग की तारीख घोषित की, लेकिन इससे पहले ही रेलवे ने 32 दुकानदारों को नोटिस भेजकर इस जमीन पर अपना दावा जता दिया। विवाद के बाद नगर निगम का कहना हैं कि उनकी रेलवे के अधिकारियों से बातचीत का दौर जारी है, ताकि जल्द ही इस मसले का हल निकाला जा सके।

मामले पर रायपुर पश्चिम से भाजपा विधायक राजेश मूणत ने बताया कि स्मार्ट सिटी ने इसे ‘यूथ हब’ बताकर बनाया और 29 लाख में संचालन एजेंसी को सौंप दिया। “60 दुकानों से हर महीने 25 हजार रुपए किराया लिया जा रहा था। कई दुकानें एग्रीमेंट के अनुसार चालू ही नहीं की गई थीं। इसलिए शिफ्टिंग की गई। कांग्रेस अब सिर्फ राजनीति के लिए विरोध कर रही है।

वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा, लैंड मार्ग का गलत उपयोग करके उस चौपाटी को बनाया गया हैं। कंपनी के साथ एग्रीमेंट करके 60 दुकानों को किराए पर दिया गया। जिसका ठेकेदार कोई और था, ऑनर कोई और था। निगम ने जल्द ही इसपर कार्यवाही की है और इस चौपाटी को शिफ्ट किया हैं, जो सुविधाएं पुराने चौपाटी पर थी, वो सुविधा हम जल्द ही उन्हें देंगे। जहाँ पहले चौपाटी थी वहाँ कई शैक्षणिक संस्था हैं, कल के दिन कोई भी बड़ी घटना हो सकती थी। मुझे लगता हैं जो नई जगह हम उन्हें दे रहे हैं, वो जगह और ज्यादा अच्छी है। जल्द ही पुराने चौपाटी के जगह पर हम नालंदा परिसर का काम करेंगे।