09 जुलाई 2026, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कस्टम मिलिंग और कोल लेवी घोटाला में आरोपी कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को आज स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। वकीलों की दलील सुनने के बाद अग्रवाल को 17 जुलाई तक के लिए EOW की रिमांड पर भेज दिया है। बता दें कि करीब तीन साल बाद रामगोपाल अग्रवाल ने बुधवार को EOW में ऑफिस में सरेंडर किया हैं। जहाँ ईओडब्ल्यू ने हिरासत में लेकर पूछताछ की।

बहुचर्चित घोटालों में आरोपी बनाए जाने के बाद से वे बीते तीन सालों से फरार चल रहे थे। ईओडब्ल्यू के साथ-साथ ईडी भी उनकी तलाश कर रही थी। पूरा मामला कोल लेवी घोटाले से जुड़ा हुआ हैं। सूर्यकांत तिवारी के गिरफ्तारी के बाद जब्त डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्री हैं। EOW का दावा हैं कि ये करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल के ज़रिए कांग्रेस भवन तक पहुंचे। पैसे कहा से आए? किसने पहुँचाया? इन पैसों का इस्तेमाल कहा किया गया? इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी हैं। वहीं मंगलवार को EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की थी।

जानिए क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला?

छत्तीसगढ़ का कथित कस्टम मिलिंग घोटाला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। EOW के मुताबिक, साल 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान में नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 127 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है।

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला?

कोल लेवी घोटाला साल 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है। ED और EOW के मुताबिक, कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि अवैध रूप से वसूली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में कई आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। इस मामले की भी जांच और सुनवाई जारी है।

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जाता है। ED और EOW की जांच में सामने आया हैं कि साल 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपए का अवैध घोटाला हुआ। मामले में कई आईएएस अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं।

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